
Atmamanthan Kabir Vani Sang (Hindi)
Sirshree
आत्ममंथन
कबीर वाणी संग
मंथन से मिले असली घी (गीता)
कभी तो स्वयं को समझो
दही को मथने पर मक्खन निकलता है। मक्खन दही में छिपा हुआ है। उसे बाहर निकालने के लिए मंथन आवश्यक है। मक्खन से ही सच्चा घी, सच्ची घीता (गीता) निर्माण होती है। आपको मंथन शक्ति से यह गीता प्राप्त करनी है।
मक्खन से जो निकला वह घी था और मनन से निकलती है गीता। मन और देह के बीच जब मंथन होगा, जब श्रवण की मथनी माया को छिन्न-भिन्न करेगी तब ही आप अपनी गीता जान पाएँगे। इसके लिए अपने मटके को मजबूत और साफ रखना होगा। यह मटका, यह शरीर मजबूत होगा तब ही यह श्रवण की मथनी को झेल पाएगा।
हर एक की गीता अलग है। जीवन के महाभारत में हर एक की भूमिका अलग है। इसलिए हरेक को आत्म-मंथन करना चाहिए। मथनी आपके हाथ में है।
इस पुस्तक द्वारा अपने आपको जानकर, अपने शरीर की वृत्तियों को परखकर, इसके संस्कार और पैटर्न छानकर आप स्वयं अपनी ‘विश्वास गीता’ का मंथन करने में काबिल हो सकते हैं।
आइए मनन की मथनी से आत्म-मंथन कर, सत्य का मक्खन पाएँ।
लोग जीवन के सबक खट्टे-मीठ्ठे अनुभवों द्वारा सीखते हैं
मगर बिना गिरे भी अनेक सबक
मनन-मंथन की शक्ति द्वारा सीखे जा सकते हैं।
Duration - 5h 12m.
Author - Sirshree.
Narrator - Leena Bhandari.
Published Date - Monday, 27 January 2025.
Copyright - © 2025 Tejgyan Global Foundation ©.
Location:
United States
Description:
आत्ममंथन कबीर वाणी संग मंथन से मिले असली घी (गीता) कभी तो स्वयं को समझो दही को मथने पर मक्खन निकलता है। मक्खन दही में छिपा हुआ है। उसे बाहर निकालने के लिए मंथन आवश्यक है। मक्खन से ही सच्चा घी, सच्ची घीता (गीता) निर्माण होती है। आपको मंथन शक्ति से यह गीता प्राप्त करनी है। मक्खन से जो निकला वह घी था और मनन से निकलती है गीता। मन और देह के बीच जब मंथन होगा, जब श्रवण की मथनी माया को छिन्न-भिन्न करेगी तब ही आप अपनी गीता जान पाएँगे। इसके लिए अपने मटके को मजबूत और साफ रखना होगा। यह मटका, यह शरीर मजबूत होगा तब ही यह श्रवण की मथनी को झेल पाएगा। हर एक की गीता अलग है। जीवन के महाभारत में हर एक की भूमिका अलग है। इसलिए हरेक को आत्म-मंथन करना चाहिए। मथनी आपके हाथ में है। इस पुस्तक द्वारा अपने आपको जानकर, अपने शरीर की वृत्तियों को परखकर, इसके संस्कार और पैटर्न छानकर आप स्वयं अपनी ‘विश्वास गीता’ का मंथन करने में काबिल हो सकते हैं। आइए मनन की मथनी से आत्म-मंथन कर, सत्य का मक्खन पाएँ। लोग जीवन के सबक खट्टे-मीठ्ठे अनुभवों द्वारा सीखते हैं मगर बिना गिरे भी अनेक सबक मनन-मंथन की शक्ति द्वारा सीखे जा सकते हैं। Duration - 5h 12m. Author - Sirshree. Narrator - Leena Bhandari. Published Date - Monday, 27 January 2025. Copyright - © 2025 Tejgyan Global Foundation ©.
Language:
Hindi
प्रारंभिक श्रेय
Duration:00:00:37
प्रस्तावना
Duration:00:09:21
भाग 1 - कभी तो स्वयं को समझो...!
Duration:00:05:56
भाग 2 - आत्म-मंथन और उलटबासियाँ
Duration:00:13:07
भाग 3 - आत्म-मंथन और खोज
Duration:00:07:50
भाग 4 - आत्म-मंथन कैसे करें
Duration:00:09:14
भाग 5 - समुंदर मंथन जैसा गहरा आत्म-मंथन
Duration:00:06:32
भाग 6 - मन क्या है
Duration:00:14:29
भाग 7 - अहंकार से बचें कैसे
Duration:00:15:20
भाग 8 - माया यानी क्या
Duration:00:12:44
भाग 9 - शब्दों का महत्त्व क्यों
Duration:00:10:48
भाग 10 - चरित्र को दौलत क्यों कहा है
Duration:00:18:33
भाग 11 - धर्म का असली अर्थ क्या है
Duration:00:10:28
भाग 12 - मूर्तिपूजा - हाँ या ना
Duration:00:09:42
भाग 13 - सत्संग व संगत रहस्य क्या है
Duration:00:14:39
भाग 14 - गुरु पहचान क्यों जरूरी
Duration:00:07:29
भाग 15 - क्या है गुरु ज्ञान
Duration:00:11:20
भाग 16 - प्यास और प्रार्थना
Duration:00:15:14
भाग 17 - प्रेम और समर्पण
Duration:00:13:19
भाग 18 - भक्ति का तोहफा
Duration:00:08:19
भाग 19 - सच्चा साधु कबीर
Duration:00:10:41
भाग 20 - गुरु और सेवा
Duration:00:07:50
भाग 21 - गुरु प्रेम
Duration:00:09:44
भाग 22 - गुरु कृपा
Duration:00:06:55
भाग 23 - सेवा का महत्त्व
Duration:00:06:45
भाग 24 - ईश्वरीय दोहे
Duration:00:20:29
भाग 25 - मृत्यु के दोहे
Duration:00:24:05
भाग 26 - उलटबासियों का अर्थ
Duration:00:07:48
सरश्री - अल्प परिचय
Duration:00:01:07
तेजज्ञान फाउंडेशन परिचय
Duration:00:00:56
महाआसमानी शिविर (निवासी)
Duration:00:01:12
समारोप
Duration:00:00:24